अगस्त में ही हो गया था मिस्त्री को निकालने का फैसला, रतन टाटा भी थे नाराज!

साइरस मिस्त्री से नाराज थे रतन टाटा, ट्रस्ट भी था खफा

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मुंबई। सोमवार को बोर्ड मीटिंग के बाद साइरस मिस्त्री को टाटा ग्रुप के चेयरमैन के पद से हटा दिया गया, लेकिन क्या यह फैसला सिर्फ एक दिन में ही की गई मीटिंग के बाद ले लिया गया? आपको बता दें कि इसकी तैयारी अगस्त से ही शुरू हो गई थी।

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मिस्त्री को निकाले जाने से एक दिन पहले रविवार को हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से डीन नितिन नोहरिया ने साइरस मिस्त्री से मुलाकात की और करीब दो घंटे तक बात की। उन्होंने मिस्त्री को यह संदेश दिया था कि अगले दिन होने वाली बोर्ड की मीटिंग में क्या हो सकता है।

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दरअसल, साइरस मिस्त्री का निकाला जाना अगस्त में ही तय हो गया था। 26 अगस्त को टाटा संस बोर्ड में पिरामल एंटरप्राइजेज के चेयरमैन अजय पिरामल और टीवीएस मोटर्स के चेयरमैन वेणु श्रीनुवासन को शामिल क्या गया था।

बताया जा रहा है कि टाटा संस के बोर्ड पर टाटा ट्रस्ट्स अपनी पकड़ को मजबूत करना चाहता था, इसलिए ही इन लोगों को बोर्ड में शामिल किया गया। इन्हें बोर्ड में शामिल करने के लिए साइरस मिस्त्री की सलाह भी नहीं ली गई थी।

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माना जा रहा है कि टाटा ग्रुप के प्रमोटर्स टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के चेयरमैन मिस्त्री के बीच विवाद चल रहा था। यह विवाद घाटे वाले बिजनेस को बेचे जाने को लेकर था। आपको बता दें कि टाटा संस के तीन चौथाई शेयर टाटा ट्रस्ट्स के पास ही हैं।

मिस्त्री द्वारा टाटा केमिकल्स बिजनेस बेचना, इंडियन होटल्स कंपनी का विदेश में कुछ होटलों को बेचना और हाल ही में ब्रिटिश स्टील बिजनेस को बंद करने का फैसला टाटा ट्रस्ट्स को पसंद नहीं आया।

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दरअसल, ब्रिटिश स्टील बिजनेस 2006 में कोरस को खरीदने के बाद टाटा ग्रुप में शामिल हुआ था और इसे रतन टाटा ने एक निर्णायक लम्हा कहा था। स्टील बिजनेस को बंद करने से टाटा ग्रुप की ब्रिटिश मीडिया में काफी आलोचना भी हुई।

कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसी कंपनियों को रतन टाटा के नेतृत्व में खरीदा गया था और ग्रुप में शामिल किया गया था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में टाटा ग्रुप का बिजनेस भी बढ़ा था। मौजूदा समय में भी ग्रुप की 67 प्रतिशत आमदनी विदेश से ही होती है।

सूत्रों की मानें तो रतन टाटा यूरोप में ग्रुप के स्टील बिजनस को बंद करने या बेचने के फैसले से नाराज थे। वह चाहते थे कि घाटे वाले बिजनस को मुनाफे में लाया जाए ना कि बेचा जाए।

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English summary
why cyrus mistry sacked from tata group
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