उल्‍टी पड़ी प्रभु की चाल, रेलवे को लगा 232 करोड़ का चूना

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नई दिल्‍ली। रेल मंत्री सुरेभ प्रभु की फ्लेक्‍सी फेयर स्‍कीम भारतीय रेलवे पर भारी पड़ रही है। निजी विमानन कंपनियों की तरह प्रीमियम ट्रेनों में फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू करने का फैसला रेलवे को रास नहीं आ रहा है।

232 करोड़ रुपए का घाटा

232 करोड़ रुपए का घाटा

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर के 15 दिनों के दौरान राजधानी, शताब्दी और दुरंतो एक्सप्रेस जैसी ट्रेनों का राजस्व पिछले साल की तुलना में 232 करोड़ रुपए कम हो गया है। यह भी माना जा रहा है कि रेलवे को यह घाटा आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। न्‍यूज रिपोर्ट के मुताबिक जाड़े की छुट्टियों, क्रिसमस और नए साल के दौरान भी रेलवे को घाटा हो सकता है। फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू होने के बाद राजधानी, शताब्दी जैसी ट्रेनों में दिसंबर और जनवरी की ज्यादातर सीटें खाली हैं। इन ट्रेनों में वो ट्रेन ज्‍यादा हैं जो गोवा, केरल, मुंबई, कोलकाता, अमृतसर, लखनऊ और चेन्नई जैसे शहरों को जोड़ती है।

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प्रीमियम ट्रेनों की सीटें भरने की दर में 15 से 20 फीसदी की कमी आई

प्रीमियम ट्रेनों की सीटें भरने की दर में 15 से 20 फीसदी की कमी आई

भारतीय रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू होने के बाद प्रीमियम ट्रेनों की सीटें भरने की दर में 15 से 20 फीसदी की कमी आई है। रेल मंत्रालय को उम्‍मीद थी कि फ्लेक्सी फेयर स्कीम लागू के बाद उसके राजस्‍व में बढ़ोतरी होगी, पर ऐसा नहीं हुआ है। अधिकारियों ने बताया टिकट महंगा होने के कारण और समय अधिक लगने के चलते लोग विमान यात्राओं को ज्‍यादा वरीयता दे रहे हैं। समाचार रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि मुंबई राजधानी, अगस्त क्रांति, सियालदाह और त्रिवेंद्रम जैसी राजधानी ट्रेनों में दिसंबर के लिए काफी सीटें अभी खाली हैं। सामान्य तौर पर इस दौरान लंबी वेटिंग हो जाती थी। पर ऐसा नहीं हुआ है।

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प्रीमियम ट्रेन में सफर करने हुआ महंगा

प्रीमियम ट्रेन में सफर करने हुआ महंगा

विमान कंपनियां यात्रियों को गोवा, कोच्चि और मुंबई के लिए 3,000 रुपए में टिकट दे रही हैं, जो इन ट्रेनों के टिकट न बिकने की एक बड़ी वजह है। लखनऊ और अमृतसर की ओर जाने वाली वाली ट्रेनों का भी यही हाल चल रहा है। आपको बताते चलें कि फ्लेक्सी फेयर स्कीम के तहत राजधानी, दुरंतों और शताब्दी ट्रेनों में प्रत्येक 10 फीसदी टिकट बिक्री के बाद 10 फीसदी किराया बढ़ा दिया जाता है। ऐसे में ट्रेन के टिकट के अंतिम किराए में डेढ़ गुना की बढ़ोतरी हो जाती है।

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पिछले साल की तुलना में 4000 करोड़ का घाटा

पिछले साल की तुलना में 4000 करोड़ का घाटा

रेलवे ने इस योजना के जरिये सालाना 1000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद की थी। इनमें से 200 करोड़ रुपए अकेले अक्टबूर में आने का अनुमान था, पर अक्‍टूबर माह की पहले 10 दिन की आमदनी देखकर यह असंभव लग रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे को इस वित्त वर्ष में सभी मदों में कुल 3,854 करोड़ रुपए घाटा हो चुका है। इसमें माल भाड़ा भी शामिल है। रेलवे को माल भाड़े से ज्‍यादा आय होती है। वित्‍त वर्ष 2015-16 की पहले छह महीनों में रेलवे का राजस्व 84,747 करोड़ रुपए था, जो इस साल घटकर 80,893 करोड़ रुपए हो गया है। अगर गौर करें तो रेलवे को करीब 4000 करोड़ का घाटा पिछले साल की तुलना में अभी तक हो चुका है।

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English summary
suresh prabhu surge price scheme fail, now indian railway faces 200 crore rupee loss
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