केरल के इस मंदिर में हैं हजारों साल पुराने 'जज अंकल'

केरल के एक प्रसिद्ध मंदिर में जज अंकल हैं जो न्याय करते हैं।

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नई दिल्ली। क्या हजारों साल पहले जो किसी राजा के समय न्याय के प्रतीक थे, आज भी लोगों को न्याय दे रहे हैं या सजा सुना रहे हैं। आपको थोड़ा आश्चर्य होगा। पर केरल के एक प्रसिद्ध मंदिर में जज अंकल हैं जो न्याय करते हैं। चाहते हैं बेहतर सेक्सुअल लाइफ, तो भूल से भी न करें ये काम: रिसर्च

judge uncle

आइए जानते हैं कौन हैं ये जज अंकल

जज अंकल यानी केरल के पोंकुणम स्थित प्रसिद्ध देवी मंदिर में इष्टदेव। स्थानीय बुद्धिजीवियों का मानना है कि ये आज भी ऐसे लोगों के साथ न्याय करते हैं जो किसी कानूनी दांवपेंच में गलत फंस जाते हैं। घर बैठे ठीक करें पैन कार्ड पर छपी गलत जानकारी, जानें पूरी प्रक्रिया

जानिए इतिहास से पूरी कहानी

दरअसल 18 शताब्दी में राजा धर्म राज कार्तिक हुआ करते थे, उनके राज्य में गोविंद पिल्लई नाम के एक न्यायाधीश भी थे। पिल्लई अपनी ईमानदारी और न्याय व्यवस्था के लिए काफी चर्चित थे। एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने ही भतीजे को मृत्युदंड की सजा सुना दी थी। जब उसे सजा हो गई तब पिल्लई को एहसास हुआ कि उन्होंने सजा सुनाने में गलती की है।

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इसके बाद अपराध बोध में पिल्लई ने राजा से कहा कि उसे दंडित किया जाए। राजा धर्म राज ने पिल्लई से कहा, वो अपनी सजा खुद तय करें। इसके बाद पिल्लई ने खुद को सजा के तौर पर पेड़ से लटकाने और दोनों पैर काटने का आदेश दिया। उनकी मौत के बाद से ये चर्चा चारों ओर इलाके में होने लगी कि पिल्लई की आत्मा आज भी वहां भटकती है। बताया जाता है कि पिल्लई की आत्मा 1100 साल पुराने एक मठ में स्थित पत्थर में सीमित थी। यही वो जगह बन गई जहां सालों से लोग न्याय की फरियाद लेकर आते हैं और अपनी व्यथा सुनाते हैं।

हर धर्म जाति के सैकड़ों भक्त न्याय के लिए आते हैं यहां

हर दिन यहां पूरे देश से सैकड़ों भक्त यहां आते हैं। छोटे मोटे कानूनी मामले हों, जमीन का विवाद हो या गंभीर आपराधिक मामला हर तरह के मामले की फरियाद लेकर इन जज अंकल के यहां पूरे देश से लोग आते हैं।

श्रीसंत भी आ चुके हैं इस मंदिर में

मंदिर प्रशासन के अनुसार, जज अंकल के यहां फरियाद करने वालों में साधारण इंसान से लेकर ब्यूरोक्रेट सहित कई वीआईपी आते रहते हैं। साल 2013 में क्रिकेटर श्रीसंत भी जज अंकल से फरियाद करने आये थे। यहां तक कि देश की तमाम कोर्ट से कई जज अपना अधिभार ग्रहण करने से पहले यहां जरूर आते हैं।

हाल ही में त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड अध्यक्ष गोपालकृष्णन सबरीमाला में हर उम्र की महिलाओं के प्रवेश देने संबंधी मामला सुप्रीम कोर्ट में सुने जाने से पहले यहां आए थे।

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English summary
Govinda Pillai was a Travancore judge of the 18th century, and is the presiding deity of the temple.
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