30 साल में देश के लिए शहीद हुआ दूसरा बेटा, बूढ़े बाप का जज्बा तो देखिए

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भोजपुर। 30 साल के अंदर बिहार में भोजपुर के जगनारायण सिंह के दोनों बेटे देश के लिए शहीद हो गए। 20 साल पहले आंखों की रोशनी खो चुके जगनारायण के दोनों बेटे सेना में थे। उनके पहले सपूत बीकानेर में हुए बम धमाके में देश के लिए कुर्बान हो गए। उसके बाद उरी आतंकी हमले में जगनारायण ने अपना दूसरा सपूत भी खो दिया।

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ashok kumar singh

'पाकिस्तान से लड़कर लेना चाहता हूं बदला'

उरी आतंकी हमले में शहीद हुए हवलदार अशोक कुमार सिंह के 78 साल के पिता जगनारायण सिंह देख नहीं सकते लेकिन वो अपने जज्बे से उम्र और हालात दोनों को मात देते दिखते हैं। वह अपनी आंखों की रोशनी फिर से पाना चाहते हैं और पाकिस्तान से लड़कर शहीद बेटों का बदला लेना चाहते हैं।

'मेरे अंदर अभी भी इतनी ताकत बची हुई है कि मैं भारतीय सेना की तरफ से पाकिस्तान से लड़ जाऊंगा और अपने बेटों की मौत का बदला लूंगा। जिस तरह से आतंकियों ने हमारे जवानों को मारा है, उसी तरह हमें भी उनको मौत के घाट उतारना चाहिए।'

30 साल के अंदर खो दिया दूसरा बेटा

यह पहली बार नहीं है जब जगनारायण को बेटे की मौत का गम मिला हो। जगनारायण के बड़े बेटे सिपाही कामता सिंह भी सेना में थे। 23 साल की उम्र में सिपाही कामता सिंह बीकानेर में हुए बम धमाके में शहीद हो गए। अपने दोनों बेटों पर जगनारायण को गर्व है।

परिवार के कई लोग हैं सेना में

जगनारायण सिंह के परिवार ने देश की सेवा के लिए अपने कई सदस्यों को सेना में भेजा है। शहीद हवलदार अशोक कुमार सिंह के बड़े बेटे विकास सिंह हाल में सेना में बहाल हुए हैं और दानापुर कैन्टोनमेंट में तैनात हैं। शहीद अशोक के दादा राजगृह सिंह, उनके दो चाचा श्याम नारायण सिंह और रामविलास सिंह भी सेना में थे। शहीद के दो भतीजे भी सेना में सेवा दे रहे हैं।

मोदी सरकार से खफा हैं जगनारायण

जगनारायण, केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से खफा हैं। उनका कहना है कि केंद्र आतंकवाद को रोकने के पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर रहा। वे कहते हैं, 'यही सरकार है जो यह कहती थी कि हमारे पांच जवानों के सर के बदले हम दुश्मनों के दस सिर काटकर लाएंगे।'

सोमवार की सुबह मिली अशोक के शहीद होने की सूचना

परिवार को जब पता चला कि उरी आतंकी हमले में शहीद हुए अधिकांश जवान बिहार रेजीमेंट से थे तो उन्होंने पता लगाना शुरू किया। उसके बाद उनको हवलदार अशोक कुमार सिंह के शहीद होने की दुखद सूचना मिली। शहीद अशोक ने हाल में ही उरी में सेना को ज्वाइन किया था। वह जुलाई में घर आए थे।

परिवार में पत्नी और दो बच्चे

शहीद अशोक के परिवार में पत्नी संगीता और दो बच्चे, विकास और विशाल हैं। विकास सेना में हैं और विशाल अभी पढ़ाई कर रहे हैं। अशोक के शहीद होने की सूचना मिलने के बाद पत्नी और मां दोनों का रो रोकर बुरा हाल है। जुलाई में जब अशोक घर आए थे तो उन्होंने पत्नी से वादा किया था कि वह उनको अपने साथ ले जाएंगे। तीन दिन पहले उनकी संगीता से बात हुई थी।

रिटायरमेंट के बाद गांव आना चाहते थे

शहीद अशोक ने 1992 में सेना ज्वाइन किया था और रिटायरमेंट के बाद वह गांव लौट आना चाहते थे। वह युवाओं को सेना में जाने के लिए उत्साहित किया करते थे।

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English summary
The two sons of Jagnarayan Singh of Bihar sacrificed life for the service of nation while working in Indian Army.
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