कुंभ में बिछड़ों को अपनों से मिलाने वाले 'खोया-पाया' बाबा नहीं रहे

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इलाहाबाद कुंभ और माघ मेले में भूले-भटके लोगों को अपनों से मिलाने वाले बाबा राजा राम तिवारी का इलाहाबाद में निधन हो गया। वह 88 वर्ष के थे।

Kumbh mela

'खोया-पाया' कैंप चलाने वाले बाबा

पिछले 71 साल से बाबा राजा राम तिवारी माघ मेले और कुंभ मेले के दौरान इलाहाबाद में संगम के किनारे 'भूले-भटके लोगों के लिए' शिविर चला रहे थे।

उनके कार्यों की वजह से लोग उन्हें उनके नाम से ज्यादा 'भूले-भटके वालों के बाबा' के रुप में जानते थे। दुनियाभर में उन्हें इसी नाम से पहचाना जाता है।

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आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने अपने कैंप के माध्यम से करीब 14 लाख वयस्कों और 21 हजार बच्चों को उनके परिवारों से मिला। उन्होंने पिछले सात दशक से खुद मेहनत करके बिछड़े हुए लोगों को अपनों से मिलाने की कवायद में जुटे रहे। फिलहाल पर गंगा सफाई अभियान से भी जुड़े हुए थे।

पिछले 71 साल से कुंभ और माघ मेले लगा रहे थे कैंप

राजा राम तिवारी के सबसे छोटे बेटे उमेश तिवारी ने बताया कि बाबू जी हाल ही में गंगा सफाई अभियान से जुड़े थे। अप्रैल महीने की पूर्णिमा को उन्होंने गंगा सफाई पर काम करने का फैसला लिया था। उन्होंने हर पूर्णिमा पर इसकी सफाई की योजना बनाई थी लेकिन वह इस क्षेत्र में ज्यादा काम नहीं कर सके। राजा राम तिवारी के चार बेटे हैं।

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राजा राम तिवारी के परिवार में उनकी पत्नी शांति देवी (85 वर्ष) समेत 28 सदस्य हैं, इनमें 20 नाती-पोते शामिल हैं। ये सभी लोग प्रतापगढ़ के रानीगंज तहसील स्थित एक गांव में रहते हैं।

राजा राम तिवारी ने 1946 में नौ सहयोगियों के साथ मिलकर 'खोया-पाया' शिविर की शुरूआत की थी। हालांकि बाद में बाकी लोग इससे अलग हो गए लेकिन राजा राम तिवारी ने अपना काम जारी रखा।

1946 में 9 लोगों के साथ मिलकर शुरू किया था कैंप

शुरू में उन्होंने हाथ के बने लाउडस्पीकर का इस्तेमाल इस कैंप में किया लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने 150 वॉलंटियर्स की पूरी टीम साल 2013 के कुंभ मेले में लगाई थी।

उनके कार्यों की वजह से उन्हें कई सम्मान भी दिए गए। उनके बारे में खास कार्यक्रम 'आज की रात है जिंदगी' भी टीवी पर 15 अक्टूबर 2015 को प्रसारित किया गया।

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English summary
Raja Ram Tiwari who ran 'lost and found camp' on the banks of the Sangam during Kumbh and Magh Melas for the past 71 years, died at Allahabad.
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