टाट्रा सौदे के लिए प्रणब दा भी दोषी!

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Defense Minister Pranab Mukherjee
दिल्ली (ब्यूरो)। सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के बोल पर जितना भी हायतौबा मचा हो पर सच तो यह है कि टाट्रा सौदे की जानकारी कहीं न कहीं सरकार को भी थी। सरकार के एक प्रमुख मंत्री और 2005 में तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने ही इस सौदे की फाइल को बंद करने का आदेश दे दिया था।

गौरतलब कि पिछले महीने जनरल वीके सिंह ने टाट्रा ट्रक सौदे में घूस की पेशकश की बात कहकर पूरे सियासी जमीन पर हलचल मचा दी थी। उसके बाद सरकार और सेना के बीच खूब वाकयुद्द हुआ पर अंततः जनरल वीके सिंह ने सेना के ही एक अधिकारी तेजिंद्र सिंह का नाम लेकर उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। सरकार भी इस बाबत कुछ सक्रिय हुई तो उसने सीबीआई जांच का आदेश दे डाला।

पर अब जो खबर आ रही है कि उससे लग रहा है कि सरकार के कई मंत्रियों को भी इस गड़बड़ी के बारे में जानकारी थी। क्योंकि जो बातें अभी चर्चा में है वह यह कि टाट्रा सौदे की जानकारी कहीं न कहीं सरकार के कुछ नुमाइंदगों के पास थी। बताया जा रहा है कि यदि यह जानकारी नहीं होती तो कैसे सरकार के मंत्री द्वारा टाट्रा की फाइल बंद करा दी जाती वह भी बिना किसी ठोस आधार के।

चर्चा है कि यदि उसी समय सौदे की पड़ताल ठीक से की गई होती तो आज यह घोटाला सामने नहीं आता। 2005 में सरकार को मीडिया से शिकायतें मिली कि देश में टाट्रा ट्रकों की खरीद एक मध्यस्थ के जरिए किया जा रहा है तो सरकार ने ठीक से इसे हैंडिल नहीं किया। हालांकि उसकी जांच कराई लेकिन बस जांच के नाम पर खानापूर्ति की गई। इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि यदि उसी समय इस सौदे की ठीक से पड़ताल होती को संभवतः सरकार को भी आज चारों तरफ से आलोचनाओं का सामना नहीं करना पड़ता।

English summary
The multi-crore Tatra truck scam threatening the army’s dignity could have been prevented if the then Defense Minister Pranab Mukherjee would have paid heed to the complaints regarding anomalies in the deal in 2005.
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