रामचरित मानस का संपादन किया, संशोधन नहीं

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जगतगुरु ने आईएएनएस से फोन पर हुई बातचीत में शुक्रवार को कहा, "रामचरित मानस में गलतियां निकाले जाने की बात पूरी तरह असत्य है। मैंने सिर्फ संपादन किया है और संपादन की बात गोस्वामी तुलसीदास ने खुद कही थी।"

उन्होंने कहा कि उनके बारे में कुछ लोगों ने भ्रांतियां फैलाई हैं ताकि विवाद खड़ा किया जा सके। जगतगुरु ने कहा, "कुछ लोग मेरी प्रतिभा को सहन नहीं कर पा रहे हैं और ये लोग ही इस तरह की भ्रांतियां फैला रहे हैं।"

वैसे पिछले दिनों अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास ने भी रामचरित मानस में गलतियां ढूंढ़ने की बात खारिज करते हुए जगतगुरु के साथ किसी भी तरह के विवाद से इंकार किया था।

उल्लेखनीय है कि जगतगुरु रामभद्राचार्य ने चित्रकूट में तुलसी पीठ की स्थापना की थी। वह अध्यात्म और धर्म से जुड़े कार्यो के अलावा शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के लिए एक विश्वविद्यालय का भी संचालन करते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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