एमनेस्टी ने की वेदांता की आलोचना

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एमनेस्टी ने की वेदांता की आलोचना

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इंग्लैंड की एल्युमिनियम कंपनी वेदांता की आलोचना की है और कहा है कि उसने उड़ीसा में स्थानीय लोगों के मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है.

कंपनी ने भारत सरकार से मांग की है कि स्थानीय लोगों की समस्याओं को सुलझाए बिना वो वेदांता को आगे विस्तार की अनुमति न दे.

हालांकि वेदांता कंपनी ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि वो मानवाधिकारों का सम्मान करती है और ऐसा कोई भी काम नहीं किया गया है जिससे स्थानीय लोगों को नुक़सान हो.

रिपोर्ट जारी करते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल के दक्षिण एशिया शोधकर्ता रमेश गोपालकृष्णन ने कहा, "वेदांता की वजह से यहां भारी जल और वायु प्रदूषण फैल रहा है जिससे यहां के लोगों को गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है."

गोपालकृष्णन ने कहा कि वेदांता ने लोगों को पहले ग़लत जानकारी दी और उन्हें आश्वस्त किया था कि वो कालाहांडी ज़िले में स्थित नियमगिरि पर्वत के आस- पास के इलाक़े को मुंबई बना देंगे.

लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ और समृद्धि और रोज़गार के बजाय यहां के लोगों को सिर्फ़ प्रदूषण और बीमारी ही मिल पाई है.

दरअसल वेदांता कंपनी उड़ीसा के कालाहांडी ज़िले में स्थित नियमगिरि पर्वत से बॉक्साइट का खनन करती है जिससे एल्यूमिनियम बनाया जाता है.

गोपालकृष्णन ने कहा कि उड़ीसा खनन निगम और वेदांता की खनन संबंधी दूसरी इकाई पास के नियामगिरी पहाड़ियों में बाक्साइट के खनन की भी योजना बना रही और इससे डोंगरिया कोंध जनजाति का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.

नियमगिरि की स्थानीय जनजाति डोंगरिया कोंध इस पर्वत को भगवान मानती है.

लेकिन उड़ीसा स्थित वेदांता औद्योगिक समूह के अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने किसी को भी अंधेरे में नहीं रखा और सभी काम नियमपूर्वक हुए हैं.

वेदांता अल्युमिनियम के प्रवक्ता शशांक पटनायक ने बीबीसी को बताया, "नियमगिरि पर्वत से वेदांता का कोई लेना देना नहीं है और ये उड़ीसा माइनिंग कार्पोरेशन की संपत्ति है. वेदांता सिर्फ़ इसका इस्तेमाल कर रहा है."

शशांक पटनायक कहते हैं कि बॉक्साइट पहाड़ की चोटी पर मिलता है और वहां कोई भी व्यक्ति या समुदाय नहीं रहता. इसलिए विस्थापन जैसी भी कोई समस्या नहीं है.

कंपनी का कहना है कि उनकी योजना को भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी मंज़ूरी दे रखी है और कंपनी स्थानीय लोगों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी सुविधाओं के अपने वायदे भी पूरे कर रही है.

लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे मानवाधिकार संगठन के आरोपों को इंग्लैंड के चर्च से भी समर्थन मिला है.

यही वजह है कि चर्च ने वेदांता से ख़ुद को अलग कर लिया और पिछले हफ़्ते वेदांता समूह से अपनी हिस्सेदारी बेच दी.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की यह रिपोर्ट अगस्त 2008 से सितंबर 2009 के बीच किए गए शोध पर आधारित है.

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