पान मसाला महंगा कर दिया, कनपुरिये वोट देंगे अब हमें?

मुजफ्फरनगर, मेरठ के कार्यकर्ता एक घंटे के लिए पार्टी कार्यालय में आ जाएं तो टोकरा भर के जली हुई बीड़िया और सिगरेट निकलती हैं। आप सिगरेट ही महंगी कर गए।

Written by: रिज़वान
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नई दिल्ली। अरुण जेटली ने आज ससंद में बजट पेश किया। कुछ चीजें सस्ती हुईं तो कुछ महंगी हुईं.. माना जा रहा था कि भाजपा इस बजट का फायदा उत्तर प्रदेश के चुनाव में फायदा लेगी लेकिन हुआ उल्टा। अमित शाह तो जेटली के पास शिकायत लेकर ही पहुंच गए।

पान मसाला मंहगा कर गिया, कनपुरिये वोट देंगे अब?

शाह- जेटली जी, जेटली जी... ये क्या किया आपने??

जेटली- अध्यक्ष जी... क्या हुआ? आपका इशारा क्या बजट की तरफ है?

शाह- हां बिल्कुल... उत्तर-प्रदेश का चुनाव किसी भी सूरत में हम जीतना चाहते हैं और आप हैं कि...

जेटली- अरे हमने तो बहुत सी चीजों पर छूट दी है। आपने देखा नहीं सब इसे लोकलुभावन बजट कह रहे हैं।

शाह- आपको तो फिक्र है नहीं चुनाव की... लेकिन हमें तो इसे उत्तर-प्रदेश चुनाव की निगाह से देखना पड़ रहा है। बहुत कुछ सोचना पड़ता है...

जेटली- आप खुलकर बताइए..

शाह- देखिए.. आपने सस्ता क्या किया? सीएनजी, सोलर उर्जा के उपकरण, बायोगैस.... तो क्या कह कर लेंगे वोट? बायोगैस खाओ????

जेटली- आयकर की बात...

शाह- छोड़िए आयकर की बात... बीड़ी-सिगरेट क्यों महंगे किए ये बताओ??? पान-मसाला और तंबाकू महंगा कर दिया... मुझे बताओ अब मैं किस मुंह से कनपुरियाओं से वोट मांगूगा...

जेटली- हां लेकिन....

शाह- अरे लेकिन-वेकिन कुछ नहीं मंत्री जी... बहुत नुकसान कर दिए हो.. मुजफ्फरनगर, मेरठ के कार्यकर्ता एक घंटे के लिए पार्टी कार्यालय में आ जाएं तो टोकरा भर के जली हुई बीड़िया और सिगरेट निकलती हैं। अब बताओ आप सिगरेट ही महंगी कर दिए.. कैसे जाऊंगा इन शहरों में वोट मांगने?

जेटली- लेकिन इससे पॉजिटिव संदेश जाएगा अध्यक्ष जी...

शाह- चुनाव में पॉजिटिव-निगेटिव के अलावा भी बहुत कुछ देखना पड़ता है। सोना तो पहले ही आम आदमी से दूर था, तुम चांदी पर भी पैसे बढ़ा दिए।

जेटली- तो आप बताइए कि क्या करना चाहिए था?

शाह- देखिए ये जो अखिलेश है, ये बड़ी लुभावनी बात करता है। इसकी काट की जा सकती थी बजट से।

जेटली- वो कैसे, मैं समझा नहीं अध्यक्ष जी???

शाह- देखो... अखिलेश बाबू ने कहा कि घी देंगे, दूध देंगे, फोन देंगे... आपको ये सारी चीजें सस्ती कर देनी थीं।

जेटली- लेकिन उनके घोषणा-पत्र की चीजें हम क्यों सस्ती करते?

शाह- अरे सुनो.. घी, दूध, साइकिल, फोन.. सब सस्ते होंगे तो जहां भी अखिलेश इनके लिए वाद करेगा, लोग कहेंगे कि ये तो हम खुद ही ले लेंगे।

जेटली- हमें क्या इत्ता बुद्धू मानते हो अध्यक्ष जी..? ये सब हमारे भी दिमाग में था लेकिन एक बात सोचकर ये सब नहीं किया..

शाह- क्या?

जेटली- अरे हम अखिलेश के घोषणा-पत्र की चीजें सस्ती करते तो आपका घोषणा-पत्र अपने-आप सस्ता नहीं हो जाता??? फिर क्या बताते जनता को?????

शाह- मेरे पास प्रधानमंत्री का फोन आ रहा है, अभी आता हूं....

(यह एक व्यंग्य लेख है)

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English summary
satire amit shah and Arun Jaitley conversation
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