शिवलिंग की पूजा करते हैं तो जरूर जानिए ये बातें...

By: पं. अनुज के शुक्ल
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लखनऊ। शिव के वास्तविक स्वरूप से अवगत होकर जाग्रत शिवलिंग का अर्थ होता है- प्रमाण, वेदों और वेदान्त में लिंग शब्द सूक्ष्म शरीर के लिए आता है। यह सूक्ष्म शरीर 17 तत्वों से बना होता है।

  • मन
  • बुद्धि
  • पांच ज्ञानेन्द्रियां
  • पांच कर्मेन्द्रियां 
  • पांच वायु।

इस लिंग के शरीर से आत्मा की सत्ता का प्रमाण मिलता है। स्कन्द पुराण में लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म होकर सब शिवलिंग में समाहित हो जाता है। 

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शरीर से आत्मा की सत्ता का प्रमाण

शरीर से आत्मा की सत्ता का प्रमाण

इस लिंग के शरीर से आत्मा की सत्ता का प्रमाण मिलता है। स्कन्द पुराण में लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म होकर सब शिवलिंग में समाहित हो जाता है। लिंग के मूल में ब्रह्रमा, विष्णु और उपर जाग्रत अवस्था में भोले नाथ विराजमान है। शिवलिंग की वेदी, महावेदी और लिंग भगवान शंकर है। सिर्फ लिंग की ही पूजा करने से त्रिदेव एंव आदि शक्ति की पूजा हो जाती है।

शान्ति और परम आनन्द का प्रमुख स्रोत है

शान्ति और परम आनन्द का प्रमुख स्रोत है

शान्ति और परम आनन्द का प्रमुख स्रोत है, ईश्वर सभी उत्कृष्ण गुणों से परिपूर्ण है। प्रत्येक मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, यह उसकी स्वाभाविक प्रकृति है। सारी सृष्टि ही शिवलिंग है। इसका एक-एक कण शिवलिंग में समाहित है। ईश्वर ने अपने समस्त पृ्रकृति में फैले हुये अपने दिव्य गुणों का लघु रूप दिया तो पहले मानव की उत्पत्ति हुयी। शिवलिंग को लिंग और योनि के मिलन के रूप में नहीं अपितु इसे सृष्टि सजृन के प्रतीक रूप में देखना चाहिए।

भारत में द्वादश ज्योर्तिलिंगों की स्थापना

भारत में द्वादश ज्योर्तिलिंगों की स्थापना

  • सोमनाथ
  • वैद्यनाथ
  • काशी विश्वनाथ
  • मल्लिकार्जुन
  • भीमशंकर
  • त्रिंबकेश्वर
  • महाकालेश्वर
  • रामेश्वर
  • केदारनाथ
  • ओंकेश्वर
  • नागेश्वर
  • घृष्णेश्वर
  • ऐसी मान्यता है कि इन 12 ज्योर्तिलिंगो के दर्शन करने मात्र से सभी प्रकार के पाप व कष्ट दूर होकर आनन्दमयी जीवन गुजारा जा सकता है।

शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों?

शिवलिंग की आधी परिक्रमा क्यों?

हमेशा शिवलिंग की परिक्रमा बॉयी ओर से प्रारम्भ कर जलधारी के निकले हुए भाग यानि स्रोत तक फिर विपरीत दिशा में लौटकर दूसरे सिरे तक आकर परिक्रमा पूरी की जाती है। जलधारी या अरघा को पैरों से लाघना नहीं चाहिए क्योंकि माना जाता है कि उस स्थान पर उर्जा और शक्ति का भण्डार होता है। जलधारी को लॉघते समय पैरों के फैलने से वार्य या रज इनसे जुड़ी विभिन्न प्रकार की शारीरिक क्रियाओं पर शक्तिशाली उर्जा का दुष्प्रभाव पड़ता है। अतः इस देव-दोष से बचना चाहिए। शिवलिंग का विधिवत पूजन व अर्चन करना चाहिए क्योंकि इसमें दैवीय शक्ति होती है, जो हमारी सभी प्रकार से रक्षा करके मनोकामनाओं को पूर्ण करती है।

घर में शिवलिंग क्यों नही रखना चाहिए?

घर में शिवलिंग क्यों नही रखना चाहिए?

  • वैसे तो घर में साधारण पूजन कक्ष होना चाहिए जिसमें रखी हुयी मूर्तियों की लम्बाई 4 इन्च से अधिक नही होनी चाहिए। 4 इन्च की लम्बाई से अधिक लम्बी मूर्तियों की विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा का विधान है, जो मन्दिरों में ही सम्भव है। भगवान शंकर के शरीर में अपार गर्म उर्जा का भण्डार है, इसलिए भोले नाथ का निवास स्थल हिमालय पर्वत है, जो सबसे अधिक ठण्डा है। विशाल जटाओं में गंगा जी समाहित जिससे उनका मन व मस्तिष्क शीतल रहता है।
  • शिवलिंग भगवान शंकर का एक अभिन्न अंग है, जो अति गर्म है, जिस कारण शिवलिंग पर जल चढ़ाने की प्रथा प्रचलित है। मन्दिरों में शिवलिंग के उपर एक घड़ा रखा होता है जिसमें से पानी की एक-2 बूंद शिवलिंग पर गिरा करती है जिससे शिवलिंग की गर्मी धीरे-धीरे शान्त होकर उसमें से सकारात्मतक उर्जा प्रवाहित होने लगती है। जो भक्तगणों के कष्टों को दूर करती है।
  • घर में शिवलिंग रखने से इस प्रकार की व्यवस्था न हो पाने के कारण उसमें से निकलने वाली गर्म उर्जा परिवार के लोगों को खासकर महिलाओं को नुकसान पहुंचाती है। जैसे- सिर दर्द, स्त्री रोग, जोडो में दर्द, मन अशान्त, घरेलू झगड़े, आर्थिक अस्थिरिता आदि प्रकार की समस्यायें घर में बनी रहती है।
  • यदि किसी घर में शिवलिंग रखा है, तो किसी शुभ मुहूर्त में निकट के मन्दिर में दान करें, तत्पश्चात उसी शिवलिंग पर रूद्राभिषेक करायें एंव पुजारी को यथा शक्ति दान व दक्षिणा दें।
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English summary
Shiva linga is an abstract or aniconic representation of the Hindu deity, Shiva, used for worship in temples, smaller shrines, or as self-manifested natural objects.
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