रेखायें सिर्फ हाथों में ही नहीं बल्कि मस्तक पर भी होती हैं....

सामुद्रिक शास्‍त्र के आधार पर विभिन्‍न अंगों की सरंचना को देख आप व्‍यक्ति के बारे में बता सकते हैं।

Written by: पं. अनुज के शु्क्ल
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लखनऊ। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार रेखायें सिर्फ हाथों में ही नहीं बल्कि मस्तक पर भी होती है। वैसे तो मस्तक पर 7 रेखाओं का उल्लेख मिलता है किन्तु सभी के मस्तक पर ये सातों रेखायें स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देती है। इन सातों रेखाओं का सम्बन्ध सात ग्रहों से है।

आइये जानते है कि मस्तक पर कौन सी रेखा कहॉ पर होती है और उसका क्या फल है।

शनि रेखा

शनि रेखा मस्तक में सबसे उपर होती है। यह रेखा अधिक लम्बी न होकर सिर्फ मस्तक के मध्य भाग में दिखाई देती है। यदि किसी का मस्तक का थोड़ा उठा हुआ है और विकसित है तथा उस पर शनि रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है तो वह व्यक्ति गंभीर, रहस्यमयी, अहंकारी आदि होता है। ऐसे व्यक्तियों के बारे में कुछ भी पता लगाना मुश्किल होता है। ये रहस्मयी विद्याओं के जानकार होते है। जैसे-ज्योतिष, तन्त्र आदि। इनके जीवन में 36 वर्ष के बाद ही सफलता मिलती है।

बृहस्पति रेखा

मस्तक पर उपर से दूसरे नम्बर की रेखा को गुरू रेखा कहते है। यह आमतौर पर शनि रेखा की अपेक्षा थोड़ी सी बड़ी होती है। जिस व्यक्ति के मस्तक पर यह रेखा लम्बी एंव स्पष्ट दिखाई देती है। वह व्यक्ति महत्वाकांक्षी व आत्म-विश्वासी होता है। ऐसे बच्चें पढ़ाई में काफी तेज होते है। ये अपनी शिक्षा के बल पर ही सफलता के मुकाम हासिल करते है। ये लोग राजनीति के क्षेत्र में भी सफलता प्राप्त करते है।

मंगल रेखा

यह रेखा गुरू रेखा नीचे एंव मस्तक के मध्य में पाई जाती है। यदि एक सपाट या उन्नत मस्तक पर मंगल रेखा शुभ गुणों से युक्त और साथ में कनपटी से उपर के स्थान थोड़ा उठे हुये हो तो ऐसा व्यक्ति पराक्रमी, आत्म-विश्वासी, तेज-तर्रार बुद्धि वाला होता है। ऐसे जातक किसी सेना, पुलिस या अन्य किसी प्रशासनिक पद पर आसीन होकर अपना जीवन व्यतीत करते है।

बुध रेखा

यह रेखा लगभग मस्तक के बीचो-बीच में होती है। अन्य रेखाओं की अपेक्षा यह रेखा लम्बी भी होती है। यदि बुध रेखा कटी, टूटी न होकर स्पष्ट व लम्बी है तो व्यक्ति की स्मरण शक्ति बहुत अच्छी होती है। ये लोग कोई भी काम पूरी ईमानदारी के साथ करते है। इनकी रूचि कलात्मक कार्यो में अधिक होती है। ऐसे लोग अपनी मेहनत के दम पर व्यवसाय में सफलता प्राप्त करते है।

शुक्र रेखा

यह रेखा बुध रेखा से ठीक नीचे होती है। यह रेखा आमतौर पर छोटे आकार की होती है। उन्नत मस्तक पर यदि शुक्र रेखा स्पष्ट रूप से दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति प्राकृतिक सौन्दर्य का प्रेमी होता है, आकर्षक व्यक्तित्व का धनी व भौतिक सुख-सुविधाओं को भोगने वाला होता है। ऐसे लोग साफ-सुथरे व ब्रान्डेड कपड़ों के शौकीन होते है। ये लोग संगीत, कला, नाटक, बालीबुड आदि क्षेत्र में अपना नाम कमा सकते है।

सूर्य रेखा

सूर्य रेखा दाहिने ऑख के उपर एक छोटी सी रेखा के रूप में स्थित होती है। यह रेखा अगर स्पष्ट व पतली है तो व्यक्ति अपने कर्मो के कारण मान-सम्मान व प्रसिद्ध प्राप्त करता है। शुभ गुणों से युक्त होने पर जातक अनुशासन पसन्द, समझदार, गणित का जानकार, शासक या अच्छे स्तर का राजनेता होता है। ऐसे लोग अपने सिद्धान्तों से कोई समझौता नहीं करते है। इनका जीवन सूर्य के समान प्रकाशित होता है।

चन्द्र रेखा

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार चन्द्र रेखा बॉयी ऑख के भौंह पर एक छोटी रेखा के रूप में स्थित होती है। यदि यह रेखा साफ-सुथरी व स्पष्ट दिखाई दे तो व्यक्ति कल्पनाओं में जीने वाला होता है और भावनाओं में बहकर किसी की हद से ज्यादा मदद करता रहता है। ये कलाओं के प्रेमी भी होती है, इनकी स्मरण शक्ति भी काफी अच्छी होती है। चित्रकला, संगीत, लेखन, सम्पादन आदि क्षेत्र में ये लोग काफी नाम कमा सकते है। इन्हें असफलता मिलने पर बहुत जल्दी तनाव भी हो जाता है। इसलिए तनाव से बचने के लिए ध्यान अवश्य करें।

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English summary
Today we will talk about the the body structure of a woman and her personality. This is a reading which tells about life according to the nature of nails.
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