गजकेसरी योग का किस राशि को क्या फल मिलेगा?

गुरू और चन्द्रमा दोनों ही ग्रहों का बलवान होने पर ही या शुभ ग्रहों से दृष्ट होने पर ही गजकेसरी योग का फल प्राप्त होता है।

Written by: पं. अनुज के शु्क्ल
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लखनऊ। ज्योतिष में हजारों प्रकार के योगों का उल्लेख मिलता है। उसी में से एक योग है गजकेसरी योग। यह योग मूलतः बृहस्पति और चन्द्रमा के संयोग से बनता है। गज का अर्थ है हाथी और केसरी मतलब सिंह। जिस प्रकार से गज और सिंह में अपार साहस, शक्ति होती है उसी प्रकार से जन्मकुण्डली में गजकेसरी योग होने से व्यक्ति साहस व सूझबूझ के दम पर, उच्च पद व प्रतिष्ठा प्राप्त कर सामाज में सम्मानीय होता है। आज हम आपको कुण्डली की लग्न के अनुसार बनने वाले गजकेसरी योग के फल के बारें में बता रहें है।

1. गजकेसरी योग

मेष
मेष राशि का स्वामी मंगल होता है। मंगल का गुरू व चन्द्रमा दोनों से सम्बन्ध अच्छा रहता है। इस राशि में गजकेसरी योग बनने से जातक साहसी व तर्कशील होता है। शत्रुओं पर विजय पाता है एंव वाद-विवाद में उसे महारथ हासिल होती है। गुरू महत्वाकांक्षा और राजनीति से जुड़ा ग्रह है, इसलिए मेष राशि वालों को गजकेसरी योग राजनीति में भी सफलता दिलाता है। आप कठोर निर्णय लेने में हिचकेंगे नहीं। धन की पर्याप्त मात्रा रहती है।

2. गजकेसरी योग

वृष
इस लग्न का स्वामी शुक्र होता है एंव चन्द्रमा तृतीयेश व गुरू अष्टमेश तथा लाभेश होता है। इस लग्न में गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति को धार्मिक कार्याे में रूचि, स्वभाव में सह्रदयता, परोपकार की भावना मन में विद्यमान रहती है। गुरू अगर अच्छी स्थिति में अचानक धन का लाभ एंव भूमि आदि मिल सकती है। चन्द्रमा पराक्रमेश होने के कारण आप-अपने बलबूते पर सफलता प्राप्त करेंगे।

3. गजकेसरी योग

मिथुन
इस लग्न में चन्दमा द्वितीयेश है और गुरू सप्तमेश व दशमेश है। गुरू व चन्द्र की युति से बनने वाला गजकेसरी योग काफी लाभकारक सिद्ध होगा। ऐसे व्यक्ति दूसरों का हित करने वाले प्रतिभाशाली होते है। गुरू दशमेश होकर अगर अच्छी पोजीशन में बैठा है तो मिथुन लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग राजनीति के क्षेत्र में सफलता दिलाता है।

4. गजकेसरी योग

कर्क
जब कर्क लग्न की कुण्डली में गजकेसरी योग का निर्माण होता है तो जातक विद्वान होता है। ऐसा व्यक्ति जिस क्षेत्र में जाता है, वहॉ लोकप्रिय हो जाता है। संस्कारों से जुड़े ऐसे जातक अपनों को साथ लेकर चलने में विश्वास करते है। ये लोग सत्य का साथ देने में विश्वास करते है। इनकी लगभग हर मनोकामनायें पूर्ण होती है।

5. गजकेसरी योग

सिंह
सिंह लग्न की कुण्डली में बनने वाला गजकेसरी योग बहुत ही फलदायक होता है। यह योग सिंह के समान शक्ति देने वाला होता है। शत्रुओं का नाश करता है, राज सुख दिलाता है, जीवन के प्रति आशावाना बनाता है, घूमने-फिरने का शौकीन बनाता है, प्रकृति के प्रति लगाव बढ़ाता है। इस लग्न में जन्में व्यक्तियों को संसार की आसुरी शक्तियों से लड़ने का जज्बा मिलता है।

6. गजकेसरी योग

कन्या
इस लग्न में जन्में जातकों के लिए भी गजकेसरी योग लाभकारी सिद्ध होता है। जिनकी कुण्डलियों में गजकेसरी होता है, उनमें निर्भीकता, बौद्धिकता, साहस, धार्मिकता, सामाजिकता व न्यायप्रियता आदि होती है। गुरू चतुर्थेश व सप्तमेश होता है और चन्द्रमा लाभ भाव का मालिक होता है। जिस कारण कन्या लग्न में बनने वाले गजकेसरी योग का युवा अवस्था में फल मिलने की सम्भावना रहती है।

7. गजकेसरी योग

तुला
तुला लग्न की कुण्डली में गुरू तृतीयेश व षष्ठेश होता है एंव चन्द्रमा दशम भाव का मालिक होता है। इसलिए इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग मिला-जुला फल देने वाला होता है। यह व्यक्ति अपने जन्म निवास दूर-दराज प्रदेश या विदेश में जाकर धन कमाता है। जातक स्वभाव से जिद्दी व तानाशाही प्रकृति का होता है।

8. गजकेसरी योग

वृश्चिक
इस लग्न में गजकेसरी योग बनने से व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में कुशल होता है एवं अपनी जुबान का पक्का होता है। साहसी कार्यो में विजय हासिल करता है। ऐसे जातक पुलिस, मेडिकल, आर्मी, वायुसेना आदि क्षेत्रों में उॅचा मुकाम हासिल करता है। ये लोग अपनी सूझबूझ के कारण काफी चर्चित रहते है।

9. गजकेसरी योग

धनु
धनु राशि का स्वामी गुरू ग्रह होता है। गजकेसरी योग में गुरू की अहम भूमिका होती है। अतः इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग ज्यादा प्रभावकारी सिद्ध होता है, लेकिन यदि गुरू बलवान अवसथा में हो तभी पूर्ण फल मिल पायेगा। ऐसा व्यक्ति धार्मिक कार्यो में लिप्त रहने वाला होता है। शिक्षा के क्षेत्र में ये लोग अच्छी प्रगति करते है।

10. गजकेसरी योग

मकर
मकर लग्न का स्वामी शनि ग्रह है। शनि और गुरू की आपस में अच्छी मित्रता है। जिस कारण इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग काफी फलदायक माना जाता है। शनि एक नाकारात्मक ग्रह है जिसका अधिक असर इस लग्न में रहता है। यदि इस लग्न की कुण्डली में शनि और गुरू दोनों बलवान है तो इस योग बेहतर फल मिलेगा अन्यथा सामान्य फल मिलेगा।

11. गजकेसरी योग

कुम्भ
इस लग्न की कुण्डली में बनने वाले गजकेसरी योग का भी अच्छा फल मिलता है। यह भी शनि की राशि है। आमदनी अठन्नी और खर्चा रूपया वाली स्थिति बनी रहती है। मित्रों के सहयोग से बड़े कामों में सफलता मिलती है। सोंचे हुये कार्य पूर्ण होते है किन्तु समय लगता है।

12. गजकेसरी योग

मीन
मीन राशि बृहस्पति की राशि है। इसलिए इस लग्न में बनने वाला गजकेसरी योग सफलता दिलाने में पूरा सहयोग करता है। ऐसा व्यक्ति धर्म का जानकार होता है, शिक्षा देने वाला गुरू व सामाज की सेवा व एक सही मार्ग दिखाने वाला समाज सुधारक होता है। इस योग वाले व्यक्ति सम्मान व प्रतिष्ठा के भूखे रहते है। समाज की इनकी हर बात को काफी तवज्जो देता है।

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English summary
Gaja Kesari Yoga is one of the auspicious yogas in Vedic Astrology. This yoga is formed in the birth-chart when Jupiter is in Kendra.
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