सफलता के शिखर तक पहुंचा सकता है वक्री बुध

By: पं. गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। आम लोगों के बीच अक्सर यह धारणा होती है कि वक्री ग्रह हमेशा परेशानियां ही देते हैं और उनसे नुकसान होता है। ऐसी बातें वे लोग करते हैं जिन्हें वैदिक ज्योतिष का ज्ञान नहीं है या मात्र सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करते हैं।

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हकीकत यह है कि वक्री ग्रह सदा नुकसान नहीं पहुंचाते बल्कि मनुष्य को शिखर तक पहुंचाने में सहायक भी होते हैं। यह ग्रहों की स्थिति पर शुभाशुभ भाव में स्थित होने के कारण होता है।

आज हम बात करते हैं वक्री बुध की...

ज्ञान, विवेक, बुद्धि, धन-संपदा

ज्ञान, विवेक, बुद्धि, धन-संपदा

ज्ञान, विवेक, बुद्धि, धन-संपदा के कारक ग्रह बुध का जन्मकुंडली में वक्री होना कई तरह की शक्तियां प्रदान कर सकता है। वक्री बुध होने से व्यक्ति को छठी इंद्रिय जैस ज्ञान प्राप्त होता है। वह समय से परे देखने की क्षमता हासिल करने और रहस्यमयी विद्याओं में रुचि रखने वाला होता है। जिन लोगों के जन्म के समय बुध वक्री होता है वे संकेत और अंतर्दृष्टि की भाषा समझने में निपुण होते हैं।

 ये वस्तुएं, स्थान और घटनाओं के बारे में अधिक सजग

ये वस्तुएं, स्थान और घटनाओं के बारे में अधिक सजग

हालांकि कई बार ये वस्तुएं, स्थान और घटनाओं के बारे में अधिक सजग नहीं होते, लेकिन इनमें तीव्र कल्पना शक्ति एवं रचनात्मक प्रवृत्ति होती है। इनका मस्तिष्क उर्वर होता है और प्रखर बुद्धिजीवी की श्रेणी में आते हैं। वक्री बुध जिनकी जन्मकुंडली में हो वे सफल भविष्यवक्ता और ज्योतिषी बनते हैं। इन्हें कई बार ऐसी घटनाओं का पूर्वाभास हो जाता है जो कोई सोच भी नहीं सकता।

 तीव्र गति

तीव्र गति

वक्री बुध यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति प्रत्येक क्षेत्र में तीव्र गति से कार्य करता है, लेकिन कई बार यही तीव्रता और उतावलापन इनके लिए नुकसानदेह हो जाता है। ये बिना सोचे-समझे निर्णय ले लेते हैं और फिर नुकसान उठाते हैं। द्वितीय भाव में वक्री बुध वाला मनुष्य अपनी बुद्धि से बहुत अधिक धन अर्जित करता है। इनकी वाणी निर्मल होती है। द्वितीय वक्री बुध की दृष्टि अष्टम भाव पर हो तो व्यक्ति बड़ा दार्शनिक और आध्यात्मिक बनता है। ऐसा व्यक्ति रहस्यमयी विद्याओं में खूब नाम कमाता है। तृतीय भाव में वक्री बुध हो तो व्यक्ति साहसी तो होता है, लेकिन इन्हें कोई भी कार्य करने के लिए परिश्रम अधिक करना होता है। पड़ोसियों से इनके विवाद होते रहते हैं।

राजसी जीवन व्यतीत करते हैं

राजसी जीवन व्यतीत करते हैं

चतुर्थ भाव में वक्री बुध वाले व्यक्ति राजसी जीवन व्यतीत करते हैं। कई नौकर-चाकर इनकी सेवा में लगे रहते हैं। पंचम वक्री बुध वाले व्यक्ति की कन्या संतानें अधिक होती हैं लेकिन इन्हीं कन्याओं के कारण ये धनी-सम्मानी बनते हैं। षष्ठम भाव में वक्री बुध बैठा हो तो व्यक्ति निराशावादी और चिड़चिड़ा होता है। सप्तम में वक्री हो तो इसे अत्यंत सुंदर जीवनसाथी मिलता है। बुध शत्रुक्षेत्री हो तो कामक्रीड़ा में व्यक्ति हमेशा अपनी पत्नी से हार जाता है। यही फल स्त्री जातक के संबंध में होता है। अष्टम भाव में वक्री बुध वाले व्यक्ति की उम्र लंबी होती है। ये अपने परिश्रम में देश-विदेश में कीर्ति अर्जित करते हैं। इन्हें लॉटरी से अचानक धन प्राप्त होता है।

राजनेता एवं असाधारण व्यक्तित्व का धनी

राजनेता एवं असाधारण व्यक्तित्व का धनी

नवम भाव का वक्री बुध व्यक्ति शास्त्रों में प्रवीण, सफल डॉक्टर, वैद्य, वैज्ञानिक बनता है। दशम वक्री बुध वाले जातक को पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है। यह राजनेता एवं असाधारण व्यक्तित्व का धनी होता है। एकादश स्थान का वक्री बुध व्यक्ति को धनाड्य, दीर्घायु, सुखी बनाता है। द्वादश स्थान का वक्री बुध शत्रुओं को पराजित करने वाला होता है। धार्मिक प्रवृत्ति का होता है।

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English summary
Before Mercury becomes retrograde it enters into retrograde zone and starts slowing down. Before it becomes stationary and starts moving into backward direction, it keeps moving into forward direction with retarded speed.
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