पूर्वजों के मोक्ष के लिए क्यों प्रसिद्ध है इलाहाबाद?

Written by: पं. अनुज के शुक्ल
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मान्यता है कि जो लोग अपना शरीर छोड़ जाते हैं, वे किसी भी लोक में या किसी भी रूप में हों, श्राद्ध पखवाड़े में पृथ्वी पर आते हैं और श्राद्ध व तर्पण से तृप्त होते हैं। शास्त्रों में पितरों का स्थाना सबसे ऊॅचा बताया गया है। पितरों की श्रेणी में मृत माता, पिता, दादा, दादी, नाना, नानी सहित सभी पूर्वज शामिल है। व्यापक दृष्टि से मृत गुरू और आचार्य भी पितरों की श्रेणी में आते है।

इन परंपराओं में छुपा है स्वस्थ, सुंदर और जवां दिखने का राज...

Why Pind daan in Allahabad?

गंगा, जमुना और सरस्वती का अद्भुत संगम इलाहाबाद के महात्म्य को विशेष बल देता है। राजा दशरथ के श्राद्ध से जुड़ी एक कहानी है। कहा जाता है कि भगवान राम ने त्रिवेणी तट पर ही अपने पूर्वजों का तर्पण किया था। कहा जाता है कि यहां राजाराम के पंडों की वो पीढ़ी आज भी है, जिसे वो अयोध्या से लेकर आए थे। प्रयाग के तीर्थ पुरोहितों के मुताबिक भगवान विष्णु चरण भी इलाहाबाद में ही विराजमान माने जाते हैं। इसीलिए श्रद्धालु अपने पूर्वजों के मोक्ष की कामना लेकर यहां आते हैं।

पितृदोष निवारण के लिए करें नारायणबलि-नागबलि

पितरों को प्रसन्न करने के कुछ सरल उपाय

  • पीपल व बरगद के पेड़ की नियमित पूजा करने से पितृ दोष का शमन होता है।
  • अपने माता-पिता व भाई-बहन की हर सम्भव सहयाता व सहयोग करें।
  • प्रत्येक अमावस्या को खीर का भोग लगाकर दक्षिण दिशा में पितरों का अवाहन करके ब्राह्रणों यथा शक्ति दक्षिणा देकर भोजन करायें।
  • सूर्योदय के समय सूर्य के सामने खड़े होकर गायत्री मन्त्र का जाप करने से लाभ मिलता है।
  • ऊॅ नवकुल नागाय विदहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प प्रचोदयात'' मन्त्र की एक माला का पितृ पक्ष में नियमित जाप करना चाहिए।
  • घर की पलंगों पर मोर का पंख लगाना चाहिए।
  • शनिवार के दिन प्रातः 9 बजे से 10:30 मि के मध्य में थोड़ा कोयला नदीं में प्रवाहित करना चाहिए।

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English summary
Allahabad is considered the sacred pilgrim place that every Hindu should visit at least once in a lifetime. Allahabad situated at Bank of the Holy River “Ganga” , Yamuna & ancient Sarasvati River also call Triveni Sangam.
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