फेंगसुई और वास्तु शास्त्र में क्या है अंतर?

By: पं. अनुज के शुक्ल
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किसी भी विधा, विचारधारा, कला या परंपरा का विकास सर्वथा उस क्षेत्र की परिस्थितियों, परिदृश्य व भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक स्थितियों का उप-उत्पाद होता है। यह अलग बात है कि उसका प्रसार व प्रयोग किसी अन्य क्षेत्र में किन कारणों से किया जाता है। यह हमेशा एक विश्लेषण की विषय-वस्तु है।

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं?

चीन के धार्मिक ग्रन्थ 'टायो' पर आधारित फेंगसुई, प्राचीन चीनी दार्शनिकों का एक चिन्तन है, जिसमें यह विचार किया गया है कि प्राकृतिक शक्तियॉ मानव जीवन और भूखण्ड को किस तरह और कैसे प्रभावित करती है। फेंगसुई के शाब्दिक अर्थ की यदि व्याख्या करें, तो फेंग का अर्थ है-वायु तथा सुई का अर्थ है-जल,। फेंगसुई शब्द वायुतत्व और जलतत्व का समन्वय है।

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जिसकी सहसहायता से प्राकृतिक शक्ति ,ची, को अधिक अनुकूल बनाया जा सकता है। ची को चीन की आत्मा कहा जाता है। अतः ची को समझे बगैर फेंगसुई की विधा में प्रवेश नहीं किया जा सकता है। चीनी विद्वानों ने प्रकृति द्वारा प्रदत्त इन शक्तियों को मानव जीवन की दैनिक शैली और भाग्य पक्ष के साथ यिन और यांग नामक दो उर्जाओं के प्रवाह से जोड़ते है।

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दो प्रमुख शक्तियॉ समग्र सृष्टि का संचालन कर रही

उनके द्वारा यिन और यांग दो प्रमुख शक्तियॉ समग्र सृष्टि का संचालन कर रही है। इन दोनों के समन्वय से ही शक्ति का संचार होता है। इन दोनों उर्जाओं यिन-यांग के सकारात्मक संचार से प्रकृति द्वारा प्रदत्त सौभाग्यवर्द्धक उर्जा ''ची'' का सजृन होता है। जिसे प्राप्त करना मानव जीवन के लिए अपरिहार्य है।

फेंगसुई क्या है और भरतीय वास्तुशास्त्र का इससे क्या सम्बन्ध है?

यह एक विचारणीय प्रश्न है। चीनी फेंगसुई के लगभग सभी सिद्धान्त भारतीय वास्तुशास्त्र से मिलते-जुलते है। सिर्फ दो सिद्धान्त एकदम विपरीत है।

  •  चीन में दक्षिण दिशा को शुभ माना जाता है जबकि भारत में यह दिशा अशुभ मानी जाती है।
  • चीन में आग्नेय कोण में जल संग्रह, फव्वारा, पौधे लगाना एंव मछली घर रखना अत्यन्त सुखदायी माना जाता है, जबकि भारत में आग्नेय कोण में जल से समबन्धित वस्तुयें रखना अहितकारी माना जाता है।

फेंगसुई के ये दो सिद्धान्त भारतीय विचारधारा के भिन्न माने जाते है, परन्तु ऐसा दोनों देशों की भिन्न-भिन्न जलवायु के कारण प्रतीत होता है।

गंगा का जल भारत के लिए अमृत तुल्य

भारत में उत्तर दिशा में हिमालय है, वहीं से पवित्रता की द्योतक महानदी गंगा का प्रार्दुभाव है। गंगा का जल भारत के लिए अमृत तुल्य और विश्व के लिए अजूबा है। उत्तर दिशा में हिमालय है जिसके शिखर पर शिव जी विराजमान है, अतः भारत के लिए उत्तर दिशा शुभ है। भारत में अधिकतर पूर्वी और उत्तरी हवायें चलती है, जो सुखद एंव अनुकूल होती है, इसलिए भारत में अधिकतर घरों में खिड़की और दरवाजे पूर्व एंव उत्तर दिशा में रखते है।

चीन की जलवायु भारत से भिन्न

चीन की जलवायु भारत से भिन्न है। चीन में उत्तर दिशा में मंगोलिया प्रदेश है, जहॉ से पीले व लाल रंग की धूल भरी ऑधियॉ व तुफान आते रहते है, इसी कारण चीन में उत्तर दिशा की ओर दरवाजा व खिड़कियॉ नहीं रखते है। उत्तर दिशा में खिड़की व दरवाजा रखने से हानिकारक धूल व मिट्टी घर में प्रवेश कर जायेगी। इसलिए वे उत्तर व पूर्व को को अधिकतर बन्द रखते है तथा दक्षिण-पूर्व को शुभ मानते है, क्योंकि दक्षिण-पूर्व से उनको स्वच्छ वायु एंव अधिक प्रकाश मिलता है।

भौगोलिक, परिस्थितिकी व पर्यावरणीय तथा सांस्कृतिक पहलुओं का प्रतिनिधित्व

चीनी फेंगसुई हो या भारतीय वास्तुशास्त्र दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों की भौगोलिक, परिस्थितिकी व पर्यावरणीय तथा सांस्कृतिक पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती है। अतः दोनों विधाओं का जनमानस के जीवन में प्रयोग सर्वथा इस बात पर निर्भर करता है कि क्या उस जीवन में वह उतना ही प्रभावी साबित हो सकती है, जितना कि अपने मूल क्षेत्र में ?

इतिहास गवाह है

इतिहास के पन्ने इस बात के गवाह है कि संस्कृति के इंटरनेशनल प्रसार का एक परिपेक्ष्य में दूसरे क्षेत्र की संस्कृति पर सांसकृतिक आक्रमण भी होता है, और चीन के इंटरनेशनल नजरिये से इस बात की पुष्टि भी होती है। बात जहांं तक सिद्ध होती है तो, फेंगसुई के भारत व अन्य क्षेत्र में प्रसार को इसी सन्दर्भ में देखा जाना व्यावहारिक है।

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English summary
Vastu is one of the most ancient sciences of architecture and is composed of specific rules, set down by sages of the Vedic times and Feng Shui is an ancient art of Chinese art who gives idea of living in harmony with environment to lead lives of contentment and happiness.
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