भारत-पाकिस्तान में रहेगा तनाव लेकिन नहीं है युद्द के आसार

By: पं अनुज के शुक्ल
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लखनऊ। पड़ोसी सीमा पर लगातार तनाव की स्थिति बनी हुयी है। पाकिस्तान अपने नापाक इरादों को कामयाब करने के लिए रणनीति रचने से बाज नहीं आ रहा है। भारत भी अब सुरक्षा के साथ-साथ आक्रमक रूख लिए हुये पाकिस्तान को करारा जवाब देने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार है।

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आइये ज्योतिषीय विशलेषण के आधार पर जानते है भारत-पाकिस्तान के आपसी टकराव में अभी और क्या-क्या होना शेष है?

भूमण्डलीय फलादेश में सूर्य व चन्द्र ग्रहण की अहम भूमिका होती है। एक वर्ष में होने वाले ग्रहणों की संख्या जब-जब बढती है तब-तब अनिष्ट प्रभाव प्रकट होते है। एक वर्ष में धरती पर सूर्य ग्रहण अधिकतम पॉच और न्यूनतम 2 होते है। एक वर्ष में 2 से अधिक सूर्य ग्रहण होना अशुभ संकेत होता है। पूर्ण सूर्य ग्रहण जल्दी नहीं होता है। किसी स्थान पर यह घटना शताब्दियों में एक बार होती है। एक चक्र में भूमण्डल पर सब प्रकारों को मिलाकर 41-42 सूर्य ग्रहण होते है। हेली एडमंड की गणना के अनुसार 20 मार्च 1140 ई0 से 22 अप्रैल 1715 ई0 तक लन्दन में कोई भी पूर्ण सूर्य ग्रहण नहीं हुआ था।

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सामन्यतः ग्रहणों में 177 दिनों का अन्तर होता है यानि एक ग्रहण से दूसरे ग्रहण के बीच कम से कम 177 दिनों का फासला होता है। इस सामान्य सीमा का उलघंन जब-जब होता है तब-तब संसार में भयावह घटनायें परिलक्षित होती है। एक वर्ष में 3-4 सूर्य ग्रहण हो तो यह स्थिति अनिष्टकारी प्रतीत होती है। ऐसे वर्षो में विशेषतया जिन देशों में ये ग्रहण दिखाई देते है, वहॉ विशेष उथल-पुथल होती है। इन परिवर्तनों का अनुषंगिक प्रभाव 10 वर्षो तक भी अनुभव में आता है।

आगे की बात तस्वीरों में...

6 सूर्य ग्रहण

6 सूर्य ग्रहण

सनद रहे कि सन् 1953-54 में कुल मिलाकर 6 सूर्य ग्रहण पड़े थे। इन 10 वर्षो में भारतीय उपमहाद्वीप में तिब्बत का हाथ से निकलना, चीन का आक्रमण, पंचशील के सिद्धान्तों का खुला मखौल, जवाहर लाल नेहरू का निधन, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी की हत्या, सन् 1965 में पाकिस्तानी आक्रमण, देशव्यापी खाद्यान्न संकट, ताशकंद समझौता, समझौते के दौरान लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु आदि घटनाओं ने पूरे उपमहाद्वीप का उद्वेलित कर दिया था।

तीन सूर्य ग्रहण

तीन सूर्य ग्रहण

सन् 1971 व 1973 में पुनः तीन सूर्य ग्रहण पड़े थे। इस दौरान पुनः पाकिस्तान से युद्ध व बांग्लादेश का उदय हुआ था। सन् 1982, 1992, 2000 ई0 में क्रमशः चार, तीन व चार सूर्य ग्रहण पड़े थे। यह समय खण्ड अपने भीतर पंजाब का आतंकवादी खालिस्तानी आन्दोलन, दो-दो प्रधान मन्त्रियों की हत्या, आपरेशन ब्लू स्टार, सत्ता परिवर्तन, मण्डल आन्दोलन व कारगिल युद्ध समेटे हुये है।

अभी नहीं है युद्ध के आसार

अभी नहीं है युद्ध के आसार

पन्द्रह दिन के अन्दर दो ग्रहणों का होना भी अशुभ होता है। सन् 2016 में 9 मार्च को पूर्ण सूर्य ग्रहण दृश्य हुआ और पन्द्रह दिन के अन्दर 23 मार्च को आशिंक चन्द्र ग्रहण पड़ा। सन् 2016 को ही 1 सितम्बर को पुनः सूर्य ग्रहण पड़ा और तत्पश्चात 16 सितम्बर को चन्द्र ग्रहण हुआ। इस खगोलीय घटना के कारण ही उरी पर आतंकवादी अटैक से 17-18 जवानों की मौत हुयी और उसके बदले भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक करके लगभग 50 आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। 10 फरवरी 2017 तक भारत और पाकिस्तान के बीच काफी तनाव भरा महौल रहेगा। इसी दौरान भारत के एक बार फिर से सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकवादियों कैम्पों को नष्ट करेगा। इसी प्रकार का तनाव भरा माहौल रहेगा किन्तु अभी युद्ध के आसार न के बराबर है।

निष्कर्ष-सन् 2018 में भारत और पाकिस्तान के बीच भीषड़ युद्ध

निष्कर्ष-सन् 2018 में भारत और पाकिस्तान के बीच भीषड़ युद्ध

आगे फिर सन् 2018 व 2019 में तीन-तीन सूर्य ग्रहण होंगे। इन ग्रहणों के कारण अगले 10 वर्षो तक भारतीय उपमहाद्वीप में अनेकों भयावह घटनायें घटने की आशंका है। सन् 2018 में 15 फरवरी, 13 जुलाई और 11 अगस्त को सूर्य ग्रहण पड़ेगा और 31 जनवरी व 27 जुलाई को चन्द्र ग्रहण होगा। सन् 2018 में पन्द्रह-पन्द्रह दिनों के भीतर दो बार ग्रहण पड़ रहा है। यह बहुत ही अशुभ संकेत है।

गुरू का अन्तर शुरू

गुरू का अन्तर शुरू

स्वतंत्र भारत की कुण्डली में 10 अगस्त 2018 से चन्द्र में गुरू का अन्तर शुरू हो जायेगा। गुरू अष्टमेश होकर शत्रु के भाव षष्ठम में बैठा है। अष्टम भाव युद्ध का और षष्ठम भाव शत्रु का कारक होता है। अक्टूबर से दिसम्बर 2018 तक शनि का प्रत्यन्तर चलेगा। अतः सन् 2018 में अक्टूबर से दिसम्बर के मध्य भारत और पाकिस्तान के बीच जबरदस्त युद्ध होगा जिसमें भारत को एक बड़ी विजय हासिल होगी और वैश्विक राजनीति में पाकिस्तान की हर तरफ अलोचना होगी।

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English summary
India and Pakistan could be in a war-like situation between 2017 and 2018, predicts an astrologer.
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