खुशी, सुख, संपत्ति प्रदान करता है गुरुवार का व्रत

By: पं.गजेंद्र शर्मा
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नई दिल्ली। हिंदू धर्म शास्त्रों में गुरुवार का दिन बृहस्पतेश्वर महादेव जी की पूजा के लिए निर्धारित है। गुरु बृहस्पति पीले रंग की वस्तुएं पसंद करते हैं, इसीलिए इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।

घर में सुख, शांति और खुशहाली लाता है बुधवार का व्रत

बृहस्पति की कृपा से घर में धन-धान्य, अन्न-वस्त्र की कभी कमी नहीं रहती, इसीलिए गृहिणियों के लिए यह व्रत करना अत्यंत उत्तम माना जाता है।

व्रत की कथा और विधि इस प्रकार है-

व्रत की कथा

किसी गांव में एक साहूकार रहता था। उसके घर में अन्न, वस्त्र, धन की भरमार थी, लेकिन उसकी पत्नी अत्यंत कंजूस थी। वह कभी किसी को कुछ भी दान नहीं देती थी। एक बृहस्पतिवार के दिन एक साधु महाराज उसके घर आकर भिक्षा मांगने लगे। साहूकार की स्त्री ने कहा कि महाराज! मैं घर लीप रही हूं। मेरा हाथ खाली नहीं है, अन्यथा मैं आपको भिक्षा अवश्य देती। वही साधु महाराज कुछ दिन बाद फिर पधारे तो उस स्त्री ने कहा कि मैं अभी अपने बच्चे को खाना खिला रही हूं। हाथ खाली नहीं है, आप किसी और समय पधारें।

तब तुम मुझे भिक्षा दोगी?

तब तुम मुझे भिक्षा दोगी?

इसके बाद तीसरी बार भी साधु महाराज के आने पर उसने यही बात कही। उसकी बात सुन साधु ने कहा कि यदि तुम्हें पूरा ही अवकाश मिल जाए, तब तुम मुझे भिक्षा दोगी? उसने कहा कि ऐसा हो जाए, तो आपकी बड़ी कृपा होगी। साधु ने कहा कि मैं तुम्हें उपाय बताता हूं। तुम बृहस्पतिवार को देर से उठना, झाड़ू करके कचरा एक तरफ लगा देना। घर के पुरूषों को दाढ़ी बनवाने अवश्य भेजना। रसोई बनाकर चूल्हे के पीछे रख देना, सामने मत रखना। अंधेरा होने पर दीपक जलाना और गुरुवार को कभी पीले कपड़े मत पहनना, ना ही पीले रंग की वस्तु खाना। ऐसा करने से अतिशीघ्र तुम घर के काम काज से पूरा अवकाश पा जाओगी।

मैं आपको क्या दे सकती हूं?

मैं आपको क्या दे सकती हूं?

साहूकार की स्त्री ने साधु की बात मानकर हर बृहस्पतिवार के दिन यही सब उपाय करना शुरू कर दिया। कुछ ही समय बाद घर की दुर्दशा हो गई और भूखों मरने की नौबत आ गई। ऐसे में वही साधु महाराज फिर पधारे और स्त्री से भिक्षा की याचना की। साहूकार की स्त्री ने कहा कि महाराज! मेरे घर में ही खाने को अन्न नहीं है। मैं आपको क्या दे सकती हूं।

अन्न- धन से परिपूर्ण हो जाए

अन्न- धन से परिपूर्ण हो जाए

उसकी बात सुनकर साधु ने कहा कि जब तुम्हारे घर में सब कुछ था, तब भी तुम व्यस्त रहने के कारण कुछ नहीं देती थी। अब तो तुम्हारे पास पूरा अवकाश है, अब भी तुम कुछ नहीं दे रही हो। आखिर तुम क्या चाहती हो। अब उस स्त्री ने साधु को पहचान लिया और उनके पैर पकड़कर बोली कि महाराज, कोई ऐसा उपाय बताएं कि मेरे दुर्दिन मिट जाएं और मेरा घर पहले की तरह अन्न- धन से परिपूर्ण हो जाए।

सायंकाल में घर पर दीपक जलाओ

सायंकाल में घर पर दीपक जलाओ

स्त्री की बात सुनकर साधु महाराज ने कहा कि हर बृहस्पतिवार जल्दी उठकर, स्नान से निवृत्त होकर गाय के गोबर से घर लीपो। गुरुवार के दिन घर के पुरूष दाढ़ी ना बनवाएं। भूखों को अन्न-जल देती रहा करो। ठीक सायंकाल में घर पर दीपक जलाओ। यदि ऐसा करोगी तो भगवान बृहस्पति तुम पर कृपा करेंगे और तुम्हारी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। साहूकार की पत्नी ने ऐसा ही किया और उसका घर शीघ्र ही सभी प्रकार के ऐश्वर्य से भर गया।

व्रत विधि

व्रत विधि

बृहस्पतिवार को भगवान बृहस्पति की पूजा होती है और उन्हें पीला रंग अत्यंत प्रिय है इसलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण करना चाहिए। भोजन भी चने की दाल का होना चाहिए और नमक नहीं खाना चाहिए। इस दिन पीले रंग के फूल, चने की दाल, पीले कपड़े और पीले चंदन से भगवान बृहस्पति का पूजन करना चाहिए। पूजा के बाद कथा अवश्य सुनना चाहिए। इस व्रत में केले का पूजन किया जाता है। भगवान बृहस्पति धन और विद्या के देवता हैं। उनकी कृपा से भक्त को हर तरह के सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

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English summary
Devotees should take meal once in a day on Thursday Fast. Meal should be made up with yellow gram pulse or gram pulse flour and ripe yellow fruit. Don’t take salt during fast.
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