गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु को क्यों कहा गया है परमब्रह्म,जानिए कितने प्रकार की होती हैं गुरु दीक्षाएं

By: पं. अनुज के शुक्ल।
Subscribe to Oneindia Hindi

भारत में गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया जाता है। प्राचीन काल से ही हमारे यहां गुरु को विशेष दर्जा दिया गया है। गुरु शब्द दो शब्दों से बना है-गु का अर्थ होता है अंधकार और रु का अर्थ है प्रकाश अर्थात जो आपको अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाये वही सच्चा गुरु है।

गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु को क्यों कहा गया है परमब्रह्म, जानिए कितने प्रकार की होती हैं गुरु दीक्षाए

वर्षा ऋतु के आरम्भ में पड़ने वाली यानि अषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन चारों वेदों के व महाभारत के रचियता, संस्कृत के परम विद्वान कृष्ण द्वैपायन व्यास जी का जन्मदिन भी मनाया जाता है। इसी दिन भक्तिकाल के संत घीनादास का भी जन्म हुआ था। यह गुरु के आदर, मान-सम्मान की पूर्णिमा है। इस दिन बंगाली साधु अपना सिर मुंडाकर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करते हैं। गुरु पूर्णिमा को ब्रज में मुडि़या पूने कहा जाता है।

गुरु का महत्व कुछ इस तरह बताया गया है-

गुरूब्र्रह्राा, गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वरः।

गुरूर्साक्षात् परमब्रह्रा तस्मै श्री गुरूवेः नमः।।

दीक्षा के आठ भेद होते हैं-

समय दीक्षा-जब आप साधना करना चाहते हैं तो सबसे पहले विचाारों का शु़द्ध होना आवश्यक है। यह साधना मार्ग का प्रथम सूत्र है।

मार्ग दीक्षा- इस दीक्षा में गुरु शिष्य को एक बीज मन्त्र देता है, जिस मन्त्र को शिष्य निरन्तर जाप करता है।

ज्ञान दीक्षा- इस दीक्षा में साधक को सर्वप्रथम ध्यान के जरिये अपने विचारों को विशुद्ध करना बतलाया जाता है।

शाम्भवी दीक्षा-यह एक ऐसी दीक्षा है, जिसमें साधना के दौरान आने वाली हर बाधा को दूर कर शिष्य की गुरु स्वयं रक्षा करने का संकल्प लेता है।

चक्र जागरण दीक्षा-इस दीक्षा में गुरु शिष्य के शरीर में स्थित मूलाधार चक्र को जागृत करने की विधि बताकर निरन्तर सहायता करता है।

विद्या दीक्षा-इस दीक्षा में गुरु अपने प्रिय शिष्य को अपने द्वारा प्राप्त ज्ञान की सिद्धियों को देता है अर्थात गुरु अपने ज्ञान के प्रकाश की ज्योति शिष्य के मस्तिष्क में प्रवेश करता है।

शिष्याभिषेक दीक्षा-इस दीक्षा में भौतिक जगत में रमे हुये मन को एकाग्र करके अध्यात्मिकता की ओर ले जाया जाता है, जिससे मन को शान्ति व शक्ति मिलती है।

पूर्णाभिषेक दीक्षा-यह एक पूर्ण दीक्षा है। इसमें गुरु अपने प्रिय शिष्य को सर्वस्व दे देता है। दीर्घ तप के बाद गुरु ने जो कुछ भी ज्ञान, सिद्धियां व आध्यात्मिक ऊर्जा अर्जन की होती है, वह सबकुछ अपने शिष्य को सौंप देता है।

read also: गुरू-पूर्णिमा: जानिए कुछ खास और रोचक बातें..

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
guru purnima, importance of guru in indian culture.
Please Wait while comments are loading...